Headline »

આપણી આસપાસ બનતી ધટનાઓની ચિંતા કરવી ખરી?

August 23, 2018 – 10:00 am | 154 views

આપણી આસપાસ બનતી ધટનાઓની ચિંતા કરવી ખરી?
* ચિંતા કરવાથી ધટનાઓ પર સારી અસર થતી હોય તો ચિંતા કરી વાજબી ગણાય; પણ ધટનાઓમાં રૂપાંતર ન થતુ હોય તો ચિંતા કરવાને બદલે કાંઈ નક્કર થઈ શકતું હોય તો કરવું પુરુષાર્થ કરતો રહેવો.ચિંતા કરવાથી કોઈ કામ ઊકલતુ નથી; ઊલટુ કામ બગડવાની શક્યતા વધારે રહે છે.

Read the full story »
યુવા જીવનશૈલી

યુવા જીવનશૈલી

બિઝનેશ જીવનશૈલી

બિઝનેશ જીવનશૈલી

આધ્યાત્મિક જીવનશૈલી

આધ્યાત્મિક જીવનશૈલી

સ્ત્રી જીવનશૈલી

સ્ત્રી જીવનશૈલી

અન્ય…

અન્ય…

Home » આધ્યાત્મિક જીવનશૈલી

श्री सरस्वती चालीसा

by on March 24, 2012 – 4:31 pm No Comment | 716 views
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
WhatsAppFacebook0Google+0Twitter0StumbleUpon0Pinterest0Reddit0

श्री सरस्वती चालीसा

दोहा

जनक जननि पदम दुरज, निज मस्तक पर धारि ।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि ।।

पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु ।
रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु ।।

चौपाई

जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी ।
जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ।।

जय जय जय वीणाकार धारी ।
करती सदा सुहंस सवारी ।।

रुप चतुर्भुजधारी माता ।
सकल विश्व अन्दर विख्याता ।।

जग में पाप बुद्धि जब होती ।
तबही धर्म की फीकी ज्योति ।।

तबहि मातु का निज अवतारा ।
पाप हीन करती महि तारा ।।

बाल्मीकि जी थे हत्यारा ।
तब प्रसाद जानै संसारा ।।

रामचरित जो रचे बनाई ।
आदि कवि पदवी को पाई ।।

कालिदास जो भये विख्याता ।
तेरी कृपा दृष्टि से माता ।।

तुलसी सूर आदि विद्वाना ।
भये और जो ज्ञानी नाना ।।

तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा ।
केवल कृपा आपकी अम्बा ।।

करहु कृपा सोई मातु भवानी ।
दुखित दीन निज दासहि जानी ।।

पुत्र करई अपराध बहूता ।
तेहि न धरइ चित सुन्दर माता ।।

राखु लाज जननि अब मेरी ।
विनय करु भाँति बहुतेरी ।।

मैं अनाथ तेरी अवलंबा ।
कृपा करऊ जय जय जगदंबा ।।

मधु कैटभ जो अति बलवाना ।
बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ।।

समर हजार पांच में घोरा ।
फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ।।

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला ।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला ।।

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी ।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ।।

चंड मुण्ड जो थे विख्याता ।
छण महु संहारेउ तेहि माता ।।

रक्तबीज से समरथ पापी ।
सुरमुनि हृ्दय धरा सब काँपी ।।

काटेउ सिर जिम कदली खम्बा ।
बार बार बिनऊं जगदंबा ।।

जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा ।
छण में वधे ताहि तू अम्बा ।।

भरत मातु बुद्धि फेरेऊ जाई ।
रामचन्द्र बनवास कराई ।।

एहिविधि रावन वध तू कीन्हा ।
सुर नर मुनि सबको सुख दीन्हा ।।

को समरथ तव यश गुन गाना ।
निगम अनादि अनंत बखाना ।।

विष्णु रुद्र अज सकहिन मारी ।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी ।।

रक्त दन्तिका और शताक्षी ।
नाम अपार है दानव भक्षी ।।

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा ।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ।।

दुर्ग आदि हरनी तू माता ।
कृपा करहु जब जब सुखदाता ।।

नृप कोपित को मारन चाहै ।
कानन में घेरे मृग नाहै ।।

सागर मध्य पोत के भंजे ।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे ।।

\"\"
रामसागर बाधि हेतु भवानी ।
कीजै कृपा दास निज जानी ।।

दोहा

मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप ।
डूबन से रक्षा करहु, परूँ न मैं भव कूप ।।

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु ।
राम सागर अधम को आश्रम तू ही ददातु ।।

Jitendra Ravia (1913 Posts)

Indian Journalist/Reporter, Editor of Daily News Paper, Writer/author of Magazine jeevanshailee, with responsibility of the Electronic media channel, GTPL.


 

Websites :
www.rajtechnologies.com (We build websites that make you money)
www.marketdecides.com (We mad a fresh business solutions)
www.jeevanshailee.com (Gujarati Vichar Sangrah)
www.brahmsamaj.org (Connecting Brahmins together )
www.virtualfollow.com ( Twitter - Get More Follows )

Get Articles in your Inbox: